Fingerprint sensor कैसे काम करता है और कितने प्रकार का होता है?-

fingerprint sensor आज के समय में यह बहुत ही पॉपुलर फीचर है जो कि हमारे स्मार्टफोन को security प्रोवाइड करता है, बजट से लेकर फ्लैगशिप तक सभी smartphone में फिंगरप्रिंट सेंसर के मदद से हम अपने स्मार्टफोन में बड़ी ही आसानी से स्मार्टफोन को सिक्योर कर पाते हैं और इसको use करना भी बहुत ही easy है, स्मार्टफोन को अनलॉक करने के लिए बस ऊँगली से tap करना होता है और बड़ी ही आसानी से हमारा फ़ोन अनलॉक हो जाता है |
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How fingerprint sensor works and how many types are-

 
इसको समझने के लिए first हमारे हाथों में मौजूद फिंगर प्रिंट की design को समझना होगा, हमारे hands और पैरों के तलवों में थोड़ा उभरी हुई और थोड़ी गहरी बहुत महीन lines दिखाई देती हैं, आप अपने अंगूठे को जरा ध्यान से देखेंगे तो आपको यह रेखाये थोड़ा clear दिखाई देंगी, सामान्यतः आपने इस ओर ध्यान नहीं दिया होगा लेकिन अपने हाथों को देखने पर यह thught आपके मन में जरूर आया होगा इतनी महीन line से क्या हो सकता है?
लेकिन जब इसे सुक्ष्मदर्शी से देखा जाए तो यह बहुत big हो जाती है, जिसे हम बड़ी ही easily से देख पाते हैं।
ये रेखायें fild में चलाए गए हल के समान होती है, आपके लिए एक फैक्ट्स की बात यह है कि पूरी दुनिया में मौजूद सभी इंसानों की अंगुलियों के निशान, एक दूसरे से हमेशा diffrent होते है।
यही reson है की हम हमारे हाथों की अँगुलियों पर पायी जाने वाली इन रेखाओ को security के लिए यूज़ कर सकते है, कुछ सामान्य लक्षणों पर किये गए रिसर्च के बाद, ये पाया गया, की अंगुलियों पर पाए जाने वाले निशान सामान्यतः four types के होते है।
1. शंख
2. चक्र
3. चाप
4. मिश्रित

Fingerprint sensor काम कैसे करता है?-

यदि आपके smartphone में Fingerprint sensor का फीचर मौजूद है तो इसका प्रयोग करने के लिए पहले हमें अपना फिंगर रजिस्टर करना पड़ता है, रजिस्टर करने के लिए जब हम अपनी अंगुली को सेंसर के ऊपर रखते है, तो यह हमारी उंगली में मौजूद रेखाओं की image अपने सॉफ्टवेयर में बना लेता है और उसे save कर लेता है, तो अब जब भी हम अपने फोन को अनलॉक करने के लिए इस sensor पर उंगली को रखते हैं।
फोन का सिस्टम smartphone में मौजूद डेटाबेस से मैच करता है, और डेटाबेस मैच होने पर फोन को अनलॉक कर देता है, सेंसर को यह work करने में एक सेकंड से भी कम time लगता है।
सेंसर हमारे अंगुली में मौजूद सारी lines का डेटाबेस नहीं बनता है बल्कि कैप्चर किये गए क्षेत्र के अंदर जितनी भी रेखाएं एक दुसरे को काटती है या एक रेखा से दूसरी line निकलती है यह उन पॉइंट्स को ही save करता है, जब एक बार इन सभी लाइन्स का डेटा डिजिटल रूप में बन जाता है तो यह सिस्टम में सेव हो जाता है जैसा की ऊपर भी बताया है, जब हम कभी(some times) ऊँगली को टेढ़ी(tilt) भी रखते है तो भी हमारा स्मार्टफोन अनलॉक हो जाता है, इसका कारण यह है कि सेंसर अनलॉक करने के लिए उस ऊँगली का जितना भी हिस्सा scan हो पाता है उसे लेकर सिस्टम में मौजूद पूरे डेटाबेस से मैच करने के बाद यदि उसमें मैच करता है तो यह unlock कर देता है|
इसके अलावा भी kuchh ऐसी परिस्थियाँ होती है जिनमें सेंसर को किस तरह work करना है वह बखूबी जानता है|

fingerprint sensor कितने प्रकार का होता है?-

ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर-

optical fingerprint scaner टेक्नोलॉजी अंगुलियों के निशान पकड़ने और डेटाबेस से मैच करने का सबसे पुराना method है, जैसा कि नाम से ही पता है, यह टेक्नोलॉजी हमारे फिंगर की एक ऑप्टिकल image कैप्चर करती हैं, इसके work करने की बात करें तो यह हमारे उंगली के सबसे lite और सबसे dark रंग को ऑब्जर्व करके, आपकी अंगुली में मौजूद एक unique pattern का पता लगाती है।
यह टेक्नोलॉजी, स्मार्टफोन के camera की तरह ही काम करती हैं, हालांकि यह एक normal कैमरे की तुलना में अधिक कंट्रास्ट वाली तस्वीरें लेती हैं, जिसके कारण अंगुली की सभी रेखाएं सपष्ट रूप से दिखाई देती है |


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कैपेसिटिव सेंसर-

इस टेक्नोलॉजी की बात करें तो, आज के समय में यह सबसे ज्यादा use किया जाने वाला फिंगरप्रिंट सेंसर है, इसका उपयोग आज के समय में smartphone में भी किया जाता है।
कैपेसिटिव फिंगरप्रिंट सेंसर में आपके अंगूठे की data इकट्ठा करने के लिए की इमेज की जगह छोटे-छोटे कैपेसिटिव सर्किट का प्रयोग किया जाता है, because कैपेसिटर इलेक्ट्रिकल चार्ज को स्टोर करते है, इसलिए स्कानेर की सतह पर कंडक्टिव plates लगाई जाती है, और उनको मेंन बोर्ड से कनेक्ट कर दिया जाता है।
अब जैसे ही हम अपनी उंगली sensor के ऊपर रखते हैं, तो जहां भी हमारी अंगुली की उभरी हुई धारियां उस plate को छूती हैं, उनमें मौजूद इलेक्ट्रिक चार्ज में परिवर्तन होता है, and जहां पर हमारी उंगली और कंडक्टिव प्लेट के बीच contact नहीं होता है, वहां पर air मौजूद रहती है, और उन कंडक्टर में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
कंडक्टर में होने वाले इन changes को track किया जाता है, जो कि हमारी फिंगरप्रिंट होता है।
कंडक्टिव प्लेट में आने वाला यह परिवर्तन बहुत ही low होता है, इन परिवर्तनो को ट्रैक करने के लिए एक op-amp इंटीग्रेटेड सर्किट का प्रयोग किया जाता है, जिसे बाद में डिजिटल में रूप में बदलकर डेटाबेस में save कर लिया जाता है। फिंगर को स्कैन करने की यह टेक्नोलॉजी old technology की तुलना में बहुत ही सिक्योर है।
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अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट स्कैनर-

यह टेक्नोलॉजी भी कैपेसिटिव फिंगरप्रिंट सेंसर की work काम करती है, फिंगर के डिटेल्स को कैप्चर करने के लिए हार्डवेयर में अल्ट्रासोनिक ट्रांसमीटर और रिसीवर दोनों होते हैं, जैसे ही हम अपनी अंगुली sacner के ऊपर रखते हैं तब एक अल्ट्रासोनिक पल्स अंगुली के sensor से निकलकर या ठीक विपरीत ट्रांसमिट होकर,
ट्रांसमीटर से रिसीवर तक जाती है और ये अल्ट्रासोनिक पल्स हमारी fingure के निशान के मुताबिक पैटर्न बनाती हुई पहुंचती है।
क्योंकि पूरी  मौजूद सभी व्यक्तियों की fingure के निशान हमेशा एक-दुसरे से भिन्न होते है इसलिए ये पल्स प्रत्येक फिंगर के लिए एक unique pattern होते है और बाद में सेंसर पर पहुंचने के बाद इसे अन्य सभी टेक्नोलॉजी की तरह digital रूप में बदलकर डेटाबेस में save कर लिया जाता है।
डिफरेंट स्मार्टफोन में मिलने वाले fingerprint sensor की स्पीड और सटीकता अलग-अलग हो सकती है।
क्योंकि हर स्मार्टफोन कंपनी अपने फोन के fingerprint sensor में अलग एल्गोरिदम का प्रयोग करते हैं ताकि उनकी यूनीकनेस बरकरार रहे।
तो दोस्तों आपके स्मार्टफोन में fingerprint sensor का फीचर मौजूद है और इसके बारे में पढ़कर कैसा लगा निचे कमेंट में लिखें, नई post की सुचना के लिए रेड कलर के subscribe बटन को दबाएं |

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